Thursday, 10 September 2020

राम मंदिर के शापित मजदूरों का सच




इतिहास इंसान को नहीं, उसकी कहानियों को याद रखता है। इतिहास सृजन और सर्वनाश के बीच बडी-बड़ी घटनाओं का गवाह बनकर कुलबुलाता रहता है। दिन, महीने, साल, दशक कभी-कभी तो सदियां भी गुज़र जाती हैं। मगर ज़ेहन में टीस हमेशा ज़िदा रहती है। 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में रामजन्मभूमि का शिलान्यास कर भले ही 492 साल पुराने मसले पर विराम लगा दिया गया। भले ही सदियों से सुलगते सवालों को आस्था की बौछार से बुझा दिया गया। मगर इन सबके बीच रामलला के राजमहल बनाने वाले मजदूरों का  शाप अभी भी खत्म नहीं हुआ। तिरपाल के अंदर भगवान राम , लक्ष्मण और माता सीता बाहर ठक ठक कर रहे मजदूरों को देखकर, अपने महल में विराजमान होने की समय सीमा पर चर्चा करने में लगे तो हैं। मगर उस रोज का वाक्या भी भूल नहीं पाते हैं। जब देश में चुनाव के आसपास उनके महल बनाने को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते थे। सुप्रीम कोर्ट से तारीख पर तारीख आती थीं। और वो बेचारे मजदूर अपने खून को पसीना समझकर बहाए जा रहे थे। बात थोड़ी पुरानी है, मगर बात व्यंग की है।      

जरा इस तिरपाल को देखिए…..अयोध्या में राम लला का ये मौजूदा निवास है। ये तिरपाल कितनी तप रही है, हम लोगों को इसका अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है। इस तिरपाल में रहने वाले लोगों की वजह से ही, बाहर ना जाने कितनों के महल बन गए, तो कितने वज़ीर और कितने राजा बन गए। लेकिन आज भी तिरपाल में रहने वाले तिरपाल में ही हैं। काफी पुरानी बात है। एकबारगी  जब रामलला से लक्ष्मण ने सवाल किया, किभगवन तिरपाल में हम रह तो रहे हैं मगर बाहर हमारी वजह से तो लोग राजा, महाराजा बन गए और कईयों के महल भी बन गए। कईयों की कहानी इतिहास में शामिल हो गई। औऱ हमलोग, वहीं के वहीं है। हमलोग कब अपना स्थान इतिहास में बदलेंगे 

राम ठहरे मर्यादा पुरूषोत्तम, कुछ देर सीता जी की तरफ देखे जो उसी तिरपाल के कोने में आराम कर रही थीं। एक पल की सोच के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम राम बोलेभाई लक्ष्मण, दरअसल माता कैकेयी ने हमारे पिता से सिर्फ 14 साल का ही वनवास नहीं मांगा था। उस मांगे हुए वनवास की समय सीमा निश्चित ही नहीं की गई थी। दरअसल हमारे पिता ने हमारा मान रखने के लिए 14 साल बोला था। इसलिए हे लक्षमण महलों का ख्वाब त्यागों देखों तिरपाल के कोने में छेद हो गया है। उसे सिलवाने का काम करो नहीं तो बारिश में ये तिरपाल भी नहीं बचेगा बेचारा भाईभक्त लक्ष्मण तिरपाल को ठीक कराने की मंशा से बाहर निकले। तभी उनकी नज़र सामने ठक ठक कर रहे मजदूरों पर पड़ी।  हालांकि उन मज़दूरों को लक्ष्मण कई सालों से देखते रहे हैं। ठक ठक करने को लेकर जब भी मजदूरों से सवाल पूछा जाता ,तो वो तपाक से बोल पड़ते, “भगवन ये ठकठक तो आपके महल के लिए ही हो रहा है। और हम इसे इसलिए बंद नहीं कर सकते हैं, क्योंकि हमें शाप लगा है  ,कि जब तक रामलला को तिरपाल से निकालकर महल में विराजमान नहीं कर देंगें, तब तक शाप मुक्त नहीं होंगे इसलिए हे लक्ष्मण, ये ठकठक राम लला के महल बनने तक चलता ही रहेगा मजदूरों के जवाब से लक्ष्मण गुस्से में आग-बबूला होकर बोल पड़ेहे मानव अगर आप मजदूर हैं तो मेरा तिरपाल ठीक कर दीजिए, बारिश आने वाली है 

मजदूर अपनी मजबूरी फिर से ज़ाहिर करने लगे, मगर लक्ष्मण के नहीं मानने पर आखिकार ठकठक कर रहे मजदूरों ने उन्हें सच बता ही दिया।भगवन हमें क्षमा करें, छोटा मुंह बड़ी बात। कुछ लोग आए थे, वो लोग आपकी तिरपाल में छेद को देखकर हंस रहे थे। हंसते हुए हमें आदेश भी दिया, कि चारों कोनों में छेद कर दो चुनाव गया है। सबकी नज़र पड़ेगी तो अच्छा रहेगा। भगवन जो ऐसा बोल रहे थे, वो इस रियासत के राजा-महाराजा लोग थे। अब आप ही बताइए, कैसे मैं आपके तिरपाल का छेद बंद कर दूं। अगर तिरपाल का छेद बंद किया, तो मेरा ठक-ठक बंद हो जाएगा। गुस्से में आए लक्ष्मण ने उन मज़दूरों को शाप दे दिया। कहा हे मानव  तू कभी शाप से मुक्त नहीं हो पाएगा। ठकठक कर रहे सारे मज़दूर एक पल के लिए रूक गए। माहौल में सन्नाटा , सारे मजदूर लक्ष्मण का मुंह ताके जा रहे थे   कुछ ही देर में सबकी आपस में नज़रें मिली और फिर दूसरे ही पल हंसते हुए ठक-ठक करने में लग गए। 

 

बेचारा भैया लक्ष्मण, कुछ देर तो उन्हें समझ नहीं आया, कि ये क्या हो गया। मगर जब उनको ये एहसास हुआ कि अगर मजदूर शाप मुक्त नहीं हुए, तो फिर उसका महल भी कभी नहीं बन पाएगा वो अनजाने में ही सही मगर अनर्थ कर गए। लक्ष्मण भागे-भागे अंदर राम जी के पास पहुंचे। सारी व्यथा सुना डाली। मर्यादा पुरूषोत्तम राम को तो सब मालूम ही था। फिर भी लक्ष्मण की तसल्ली के लिए हंसते हुए बोल पड़े, “हे भ्राता लक्ष्मण ,तुम्हारा शाप तो पहले से ही तय था, इसमें चिंता की कोई बात नहीं।  शाप तो सच पहले ही हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने महल बनाने की तारीख आगे बढ़ाकर फिर अगली तारीख दे दी। फ़िक्र मत करो भैया लक्षमण, चुनाव बीत जाने दो, फिर तरपाल की भी मरम्मत हो जाएगी और अगर यही राजा और वजीर रहे, तो फिर महलशायदबन ही जाएगा।


आखिरकार सदियों बाद ही सही रामलला के महल बनने की नींव तो पड़ चुकी है। बस इंतजार तो उन मजदूरों के शाप कटने का है। बहरहाल ये शाप अभी कुछ बरसों तक और भी रहेगा। तब तक के लिए भैया लक्ष्मण तिरपाल में बैठकर उन मज़दूरों के ठक-ठक की गिनती कर रहे हैं। मगर पूरे भारतवर्ष में रामलला के महल को लेकर सुकून भरी ख़बर तो ही गई है। बस इंतजार है इस दूसरे वनवास के खत्म होने का। वो भी जल्द ही जाएगा। कबीर की कुछ लाइन यूं ही याद गई। 




मोमे तोमे सरब मे जहं देखु तहं राम


राम बिना छिन ऐक ही, सरै ऐको काम।  

       -कबीर


मुझ में तुम में सभी लोगों में जहां देखता हूं वहीं राम है।

राम के बिना एक क्षण भी प्रतीत नहीं होता है।

राम के बिना कोई कार्य सफल नहीं होता है।



#कातिब &  #कहानीबाज

रजनीश बाबा मेहता