Tuesday, 1 October 2013

Almost Virgin डायरी (8)


 

ये उसकी कहानी है। दिल्ली की एक लड़की की कहानी। उस लड़की की कहानी जिसकी जिंदगी जीने की अपनी टर्म्स एंड कंडीशंस है। वो चाहती है कि घटिया लोगों का जवाब उन्हीं के तरीके से दिया जाए... हां, अगर मैं कुछ ज्यादा ही ओपननेस के साथ बात कर रही हूं तो डोंट थिंक रॉन्ग... मैं कोई ऐसी-वैसी उस टाइप की लड़की नहीं हूं...आपसे कुछ शेयर करना चाहती हूं तो इसलिए कि यस-यस...नो...नो...के डायलेमा में फंसी हजारों लड़कियों में डिसीजन लेने की डेयरिंग आ सके... वे उन कंडीशंस से निपटने की हिम्मत पैदा कर सकें। वे उन कंडीशंस से निपटने की हिम्मत पैदा कर सकें, जो लड़कियां होने के कारण कदम-कदम पर फेस करती हैं। 

 

सीन 1 : दोस्ताना   

आजकल मेरे दिन फेसबुक पर ज्यादा बीतने लगे थे। अकेली और सिंगल लाइफ में रियल लाइफ के दोस्तों से मिलना जुलना अब कुछ कम होने लगा था। कुछ सहेलियों की शादी हो गई थी और श्वेता और विभा जैसी मेरी अच्छी दोस्त  अपने  ब्वॉयफ्रेंड और मंगेतर संग बिजी थी ऐसे में मेरी लाइफस्टाइल में भी चेंज आ गया था। अब में इंटरनेट के  संसार में अपना समय कुछ अधिक बिताने लगी थी। यूं तो दिन में कई बार फेसबुक पर लोगों की पोस्ट को रीड करना और लाइक करना नया सगल बन गया था, लेकिन शाम के 6 बजे का मुझे कुछ ज्यादा ही इंतजार रहने लगा था और उसका सबसे बड़ा कारण था फेसबुक पर मेरा नया दोस्त अमय वत्स । अमय थोड़ा रोमांटिक होने के साथ ही कुछ इमोशनल टाइप का बंदा लगा था और सबसे खास बात जो मुझे उसमें नजर आई थी वो उसका लुक। कुछ दिनों बात करने के बाद मैंने उसे समझने के लिए थोड़ा बोल्ड और बिंदास अंदाज में बात करने की कोशिश भी की, लेकिन वह इन सब बातों से बचने की कोशिश करता था। मुझे वह डिसेंट लगा। दूसरे अन्य लोगों की तरह कम से कम पिछले तीन माह की चैटिंग में मेरे फिगर को लेकर कोई सवाल जवाब नहीं किया था। ऐसा कुछ नहीं पूछा था, जिससे लगा हो कि यह बंदा लड़कियों के मामलें में कुछ कमजोर किस्म का है। 
सीन 2 : उस दिन लगा कि मैं अमय से प्या‍र करने लगी हूं 

मेरी सिंगल लाइफ में फेसबुक के कारण थोड़ा रोमांटिक टिवस्ट‍ आ गया था और यह बात मुझे उस वक्त समझ में आई जब अमय से वन वीक मेरी बातचीत नहीं हो पाई। मैं उन सात दिनों में उसे बहुत मिस करने लगी थी और यह एक ऐसी बात थी, जिसने मुझे लगभग बैचेन कर दिया था। पहले तो लगा कि इंटरनेट की लत के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन दिमाग की घंटी बजी और दिल ने कहा मैडम आप इंटरनेट पर तो रोज ही आ रही है लोगों से बात करती है, दोस्तों की पोस्ट लाइक करती है....ऐसे में अगर आप उसे मिस कर रही हैं तो इसमें इंटरनेट का नहीं, बल्कि आपके दिल में अमय के लिए प्यार भरे जज्बात का होना है।  दिमाग में चल रहे सवाल का समाधान खोजने में लगी थी कि अगले ही पल मैनें लेपटॉप ऑन किया और अमय की फेसबुक फ्रोफाइल देखना शुरू किया और  मुझे ये तो पता था कि बंदा दिल्ली का है और एक एमएनसी में काम करता है, लेकिन आज यह देखकर दिल खुश हो गया कि जनाब ने अपना नंबर भी फेसबुक पर अपडेट किया हुआ है। मैं सोच में पढ़ गई अमय से तीन माह से बात कर रही हूं पहले भी  उसका प्रोफाइल देखा है, लेकिन जनाब ने इससे पहले तो कभी अपना नंबर यहां शेयर नहीं किया था पिछले एक सप्ताह से बात भी नहीं हुई कहीं अमय मुझसे किसी बात पर नाराज तो नहीं जो फेसबुक पर आए, नंबर अपडेट किया और अन्य दोस्तों  से कुछ बात की हो और मुझे इग्नोर कर दिया हो। या कहीं ऐसा तो नहीं कि वह ऑनलाइन रहा हो और मैं ही उस वक्त एफबी पर नहीं रही हूं। फिर दिल ने कहा यार अगर ऐसा होता तो कम से कम कोई मेसैज तो देता । ये बातें सोचते-सोचते मेरा ब्लड प्रेशर कुछ बढ़ गया था और मैं पेरशान हो चुकी थी। मुझे उस दिन पहली बार लगा कि मैं इसे इतना मिस कर रहीं हूं कहीं ये प्यार तो नहीं ?
सीन 3 : कुछ ऐसे हुई मोबाइल पर पहली बार बात 

रात को खाना खाने के बाद छत पर टहलते हुए मेरे मन में वही सवाल चल रहे थे, फोन पर कई बार एफबी का एकाउंट चेक कर चुकी थी कोई नया मैसेज नहीं था। हां, कुछ दोस्तों ने मेरी आज की एक तस्वीर फेसबुक पर देखकर ये जरूर अनुमान लगा लिया था कि मैं आज कुछ अफसेट हूं, मैं हैरान थी तो क्या इसका मतलब फेसबुक पर फोटो में देखकर लोग हाले दिल भी पता कर लेंगे। तभी मन में विचार आया कि अमय को कॉल किया जाए बंदा है तो दिल्ली का ही एक बार बात करके देखते हैं, सब ठीक तो है ना  और कुछ देर बाद मेरे फोन पर एक मधुर आवाज आई और वह अमय की थी, मेरे हैलो का जवाब में उसने कहा मैडम " क्या जान सकता हूं कि आप कौन बोल रही है ?" मैनें कहा "जी सरकार आप जान सकते नहीं, आप तो हमें जानते ही हैं बस आप हमें पहचानते नहीं है, फिर जानबूझकर टाल रहे हैं ?"

 "जी नहीं ऐसी बात नहीं, कहीं आप पिहू तो नहीं हो ?" 

"ना जी सरकार आपका जवाब गलत है" 

"ओह तो आप शायद पूजा जी हो" 

इस बार मैं हंस पड़ी "तो क्या आपका जवाब लॉक कर दिया जाए? सोच लो गलत निकला तो हर्जाना देना पड़ सकता है ?" 

मेरी इस बात पर उसने कहा "ओह तो आप स्वीटी बोल रही हो ।" 

इस बार मैनें चुटकी लेते हुए कहा "कमाल करते हो अमय कितनी गर्लफ्रेंड है यार तुम्हारी कभी इन नामों का जिक्र नहीं किया और हमें तो आप भूल ही गए यार... मैं रिया बोल रही हू,..आपकी फेसबुक दोस्त काफी दिनों से बात नहीं हुई थी सो फेसबुक पर आपका नंबर मिल गया तो कॉल कर लिया ?"

"ओह ग्रेट....तो ये आप है मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा और पिहू मेरी कजिन है कभी-कभी ऐसे मजाक वो करती रहती है। स्वीटी और पूजा मेरे ऑफिस में काम करती है कई दिनों से ऑफिस जाना नहीं हो पाया था, इसलिए लगा कि हो ना हो वहीं दोनों टांग खिचाई कर रहीं हो ।"

 मैंने फिर थोड़ा सा फन करते हुए "अच्छा जी तो ये टांग खिचाई के कारण ही जनाब वन वीक से नहीं आ रहे थे, लड़कियों के साथ टांग खिचाई का खेल खेलना अच्छी बात नहीं अमय।" 

"अरे नहीं रिचा ऐसी बात नहीं  आप मजाक अच्छा कर लेती हो। दरअसल, मैं इन दिनो इंटरनेट पर अधिक रहने लगा था, इसलिए एक दिन मॉम ने नाराज होकर मेरा लेपटॉप और मोबाइल का इंटरनेट कनेक्शन 10 दिन के लिए बंद रखने का फरमान दे दिया था सो मैं मां की बात टाल नहीं सका ...."

 अमय की बात सुनकर मैं हैरान रह गई और बोल पड़ी "तो आप मॅाम बॅाय हो .... सो स्वीट यार पर 10 दिन इंटरनेट से दूर रहने में आपको बेचैनी महसूस नहीं होती ।" "होती है यार... पर मां से बड़ा कोई और होता है क्‍या ? खैर इसके बाद अमय के साथ मेरी लंबी बातचीत हुई और मैंने उससे अगले दिन गुड़गांव के मॉल में मिलने के लिए यहकर बुला लिया कि "यार इतने दिन बात करते हुए हो गए एक मुलाकात हो जाए वीकएंड पर ।" मेरी इस बात पर सहमति जताते हुए वह शाम 5 बजे  मॉल में मिलने के लिए तैयार हो गया । 
सीन 4 : पहली मुलाकात में अमय तो मा दा लाडला ?

अमय से मिलने के लिए मैं बेहद उत्सुक थी सो उस दिन अपनी सबसे प्‍यारी नई ड्रेस पहनी और आज बहुत दिन बाद मैं ब्यूटी पार्लर भी गई थी।  6 बजे अमय से मुलाकात हुई जनाब  जींस  पेंट और ब्लैक शर्ट में आए थे, बंदा हैंडसम लग रहा था और हाय हैलो के बाद हम फूड कार्नर की तरफ बढ़ चले थे। इस दौरान मैनें नोट किया कि 10 मिनट में अमय तीन बार अपनी मम्मी का कॉल रिसीव कर चुका था और इस बात की सूचना दे चुका था कि मैं ठीक-ठाक हूं और सही टाइम पर मॉल में सकुशल पहुच चुका हूं । मैनें अमय से पूछा "तो क्या आपकी मां यह जानती है कि आप यहां आए हैं?" वह बोला "हां यार, मैं मां से पूछे बिना कोई काम नहीं करता है वह मेरी बहुत चिंता करती है।" मैनें अगला सवाल किया कि तो क्या वह जानती है कि तुम यहां क्यों  आए हो । वह बोला "हां रिया मैनें उनको बता दिया था कि मैं यहां तुम से मिलने ही आ रहा हू ।" मैं हैरान थी कोई लड़का हर एक बात अपनी मम्मी से शेयर करता है या पूछकर करता है। इतना तो लड़किया भी नहीं सोचती आजकल ।

 कुछ देर हम बात करते रहे कि तभी अमय ने कहा "एक मिनट मां फोन पर है मैं अभी बात करके आता हूं .... मैं ओके कहकर मैन्यू  देखने लगी और अपनी पसंद का खाना आर्डर करने ही वाली थी कि अमय आया और बोला "सॉरी वो मां आपके बारे में पूछ रही थी सो वही बताने लगा था ।" मैनें आश्चमर्य में पढ़ते हुए पूछा "क्या बताया फिर तुमने'.... 'अरे कुछ नहीं यहीं की आप किस तरह की ड्रेस पहनती है,  ड्रिंक करना आपको पसंद नहीं और हां मां ने खाने के लिए जरूरी टिप्स भी दिया ।" मैं उसकी बात सुनकर हिल पडी और मैनें कहा "यार अमय ये किसने कह दिया कि मैं ड्रिंक नहीं करती और रही बात पहनने की तो यार मैं तो हर तरह के कपड़े पहनना पसंद करती हूं यहां तक कि शार्ट -स्कर्ट भी इसमें बुराई क्या है। अच्छा  ये बताओं खाने में क्या आर्डर करना है वैसे एक बात बता दू तुम्हारा ये सोचना गलत है कि मैं नॉनवेज नहीं खाती"  इस पर अमय बोला "वो आपकी फेसबुक प्रोफाइल पर देखा था इसलिए मां को बोल दिया वो क्या है ना मेरी मम्मी पूजा पाठ बहुत करती हैं इसलिए नॉनवेज से हमें दूर रहने को कहती है। रही बात फूड की तो मेरे लिए सिंपल दही और चपाती का आर्डर कर दो और आप अपनी पसंद के अनुसार कुछ भी ले लो। ड्रिंक और नॉनवेज नो प्लीज ।"  मैनें ओके कहा और अपने लिए सिंपल थाली का आर्डर कर  दिया। खाना खाते समय तीन बार उसकी मां का फोन आया और वहीं सब इधर उधर की बातें साथ ही शाम 9 बजे तक घर आने की हिदायत अमय को मिल चुकी थी ।

कुछ देर मॉल में हम साथ घूमते रहे और इस बीच मैनें पूछा "अमय मां के करीब होना अच्छी बात है, लेकिन क्या सचमुच तुम नॉनवेज या फिर कभी ड्रिंक करना पसंद नहीं करते ।" अमय बोला ऐसा नहीं मैं नॉनवेज पसंद करता हूं, लेकिन जब से मां को पता चला, डांट पड़ी है तब से सब बंद ।" साथ ही उसने बताया कि सच तो यह है कि वह मां से दूर या उनकी कही बात कभी टाल नहीं पाता। तभी एक बार फिर उसके मोबाइल की रिंग बज उठी और इस बार भी उसकी मां ही फोन पर थी। कुछ देर बात करने के बाद अमय ने बताया कि "मां का कहना है कि 8 बजकर 25 मिनट हो गए हैं और मुझे 9 बजे तक हर हाल में घर पहुंच जाना चाहिए सो अब हमें चलना चाहिए ।' मैं कहना चाहती थी कि साथ में कोई फिल्म देख लेते हैं, लेकिन जनाब की मां का फरमान सुनकर मैंने अपने दिल की बात को टालना ही मुनासिब समझा और हम दोनों ने एक-दूसरे को अलविदा कहकर अपने-अपने रास्ते निकल पड़े 


सीन 5 :  हमनें अपने दिल को कुछ यूं समझाया 

घर पहुचकर मेरे माइंड में जो सबसे बड़ा सवाल उठा कि क्या ऐसे लड़के के साथ मैं जिंदगी गुजारना पसंद करूंगी जो हर एक बात में अपनी मां की सलाह लेता हो ? मान लो मैं ऐसा करती हूं तो क्या बाद में उसकी मां से मेरी छोटी-छोटी बातों पर नोक-झोंक नहीं होगी ? ऐसा सोचना ही था कि मुझे एकता कपूर के सास - बहू वाले नाटक याद आ गए, जिनको देखने के बाद मैं सोचती थी क्या ऐसे भी बहुए अपनी सास से लड़ती होंगी? तभी खुद ही जवाब अपने आप मिल गया। हां, रिया अगर अमय जैसे पति हो जो बीवी की बात ना मानकर केवल अपनी मां की बात मानकर चले तो कोई भी बहू होगी सास से तो लड़ ही जाएगी और उसके बाद क्या होगा ? वहीं अमय अपनी मां का पक्ष लेते हुए अपनी वाइफ को ही सुनाएगा । मैं इस विचार को सोचकर ही डर गई मन को यह समझाने की कोशिश की। यार थोड़ा बहुत तो हर कोई मां के करीब रहता है, लेकिन अमय के साथ प्यार में पढ़ने और उसे जीवनसाथी के रूप में चुनने का प्लान मैंने कैंसिल कर दिया। हैंडसम और अच्छी‍ जॉब करने वाला बंदा सिर्फ इसलिए मिस कर दिया क्यों कि जनाब के अपने कोई विचार थे ही नहीं वो जो कुछ भी करते थे सब अपनी मां से पूछकर।

 



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