कहानीबाज हूं मैं किताबों के सहारे जिंदगी कट जाए तो जिंदगी कैसी होगी ? पता नहीं!लेकिन किताबों के सहारे जिंदगी के साथ मैं हर उस कहानी को सुनहरे पर्दे पर प्रकाश की परिकल्पना करते हुए पेश करना चाहता हूं जिसमें मैंने सिनेमा की झलक देखी है। मैने अपनी जिंदगी से शर्त लगा रखी है कि मैं अपने ज़ेहन में बसी हर कहानी को सिनेमा का वो रूप दूंगा, जिसे दुनिया देखती रह जाएगी। फिल्म मेरे लिए नशा है। मैं इसी नशे में जिऊंगा।
Wednesday, 14 July 2021
सफ़र का साथी_कहानीबाज़
सफ़र का साथी हूं
सफ़र की ही बात करता हूं।
बस सफ़र में ही रहना चाहता हूं।
कहीं कहीं से लफ्ज़ चुनकर लाता हूं
बिन धागों की स्याही से पिरो जाता हूं।
इश्क़ औऱ अंतहीन सफ़र
दोनों एक जैसे होते हैं।
हर बार वही नयापन
हर बार वही ताज़गी।
मिलो ना कभी,
ख़ामोश ख़्वाहिशों के साथ।
ख़्वाब को भी ले आना।।
आज एहसासों को
शाम के सफ़र पे जो बुलाया है।
रूह अगर सुकून बन गई
तो हर्फ़ बेआबरू भी हो सकती है।
आसमान में पूरा चांद रहा
तो मुशायरों की महफ़िल भी हो सकती है।
फुर्सत मिले
तो एक हल्की हंसी के साथ आ जाना।
सफ़र पर थोड़ा सिनेमाई इश्क़ का घूंट पिला जाना।
सुन तो लो,
मिलो कभी सफ़र पर
कोरे कागज़ों पर बिखरी गज़ल सुनेंगे
किस्से-कहानियां बुनेंगे
तुम हौले-हौले कहना
मैं धीमे-धीमे लिखूंगा।
सुनो ना,
मिलो तो उस अंतहीन सफर पर
जहां दोनों मिलकर
किस्से- कहानियां बुनेंगे।
मिल रहे हो ना।
इंतज़ार करूंगा
उस अंतहीन सफर पर ।
आना जरूर।
कहानीबाज़#
रजनीश बाबा मेहता
I am कहानीबाज़। कहानियां लिखता हूं, औऱ फिर उसे सिनेमाई परदे तक पहुंचा कर कहानियों को मोक्ष की प्राप्ति करवाता हूं।
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