Sunday, 27 January 2013

त्रिपुरारी शर्मा: नाटक मेबी दिस समर समीक्षा... रजनीश की कलम से


Rajnish Kumar The Director, Writer 
निर्देशक त्रिपुरारी शर्मा
Laboni Performing Arts, New Delhi
बिना शादी किए लिव इन रिलेशनशिप के तहत पति-पत्नी की तरह रहना इतना भी आसान नहीं है, जितना कि आजकल के युवाओं को लगता है। 15वें भारत रंग महोत्सव के दौरान राष्ट्रीय नाट्य विघालय के सम्मुख सभागार में पेश किए गए नाटक Maybe This Summer में इस जटिल रिश्ते की इन्हीं उलझनों को पेश किया गया।
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में प्रोफेसर त्रिपुरारी शर्मा द्वारा लिखा गया व उन्हीं के द्वारा निर्देशित इस नाटक को बेहद गजब की पेशकारी के साथ टीकम जोशी और गौरी देवल ने सम्मुख सभागार में प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति के दौरान ज्यादा दर्शकों की नामौजूदगी मुझे इसलिए खल रही थी कि एक तो सभागार बहुत छोटा था और दूसरी बात ये कि इतना बढ़िया नाटक इतने छोटे सभागार में क्यों किया गया। जब नाटक बेहतरीन होता है तो उसे हमेशा बड़े सभागार में करवाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शक बढ़िया नाटक का लुत्फ ले सकें।
नाटक मे बी दिस समर एक बड़े शहर में साथ रह रहे एक लड़के और लड़की के बारे में था। बड़े शहरों में इस तरह साथ रहने की प्रवृति लगातार बढ़ रही है। दोनों कामकाजी है और दोनों ने अपना स्थान खुद बनाया है। यह नाटक इस तरह के रिश्ते की प्रकृति और जटिलता को सामने लाने के प्रयास के रूप में पेश किया गया। नाटक ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह जीवन को जीने का अर्थपूर्ण तरीका है ?
नाटक लिव इन रिलेशनशिप के तहत रहने वाले युवाओं के लिए भी सवाल उठाए कि क्या उन्हे शादी नहीं कर लेनी चाहिए या फिर अलग-अलग हो जाना चाहिए ? इस तरह के रिश्तों की भावनात्मक डोर आखिर कितनी मजबूत होती है ?
इसके साथ ही नाटक में दिखाया गया कि दोनों पात्र शहरी जीवन से आए हैं, और अपने साथ अपना परिवेश भी लेकर जी रहे है। दोनों के अपने अपने जीवन मूल्य है। क्या वह स्थान कभी घर बन सकता है जहा इस तरह के युवा एक घर की ही तरह रहने का प्रयास करते है। नाटक में दिखाया कि दोनों पात्र एक-दूसरे को समझते है, और बेहद प्यार भी करते है, लेकिन बहुत सारे सवाल उन्हें घेर लेते हैं, और उन्हे अंतत: इस निर्णय पर पहुचना ही पड़ता है, कि अब या तो उन्हे शादी कर लेनी चाहिए या फिर एक दूसरे को छोड़कर चले जाना चाहिए।
सवालों के उहापोह के बीच 2 घंटे का नाटक कैसे अपने अंजाम तक पहुंच जाता है ये पता ही नहीं चल पता है। इसमें जितनी मेहनत लेखिका त्रिपुरारी शर्मा ने अपने लिखे संवाद के जरिए किया उतना की अभिनेता ने भी किया। उम्रदराज लेखिका त्रिपुरारी शर्मा ने ऐसे कसे संवाद लिखे हैं जिससे हर युवा पीढी कहीं ना कहीं इत्तफाक रखता है।  मुझे अपने थिएटर के करियर में पहली बार ऐसा लगा कि इस नाटक में मैं अभिनय कर रहा हूं। एक कमरे में जब कहानी शुरू होती है तो फिर अभिनेता पूरे 2 घंटे तक मंच पर टिके रहकर दर्शकों के बांधे रखता है। ऐसे नाटक को देखकर दिल गदगद हो जाता है क्योंकि नाटक के बाद तुरंत ये एहसास होता है कि त्रिपुरारी शर्मा जैसे नाटककार और लेखिका मौजूद हैं तब तक इस विधा में तरह तरह की सुखद अनुभूति का एहसास दर्शकों को समय समय पर मिलता रहेगा।
नाटक मे बी दिस समर में मंच सज्जा भी खूबसूरती से किया गया। एक लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े को कमरे में जिस तरह से समान रहता है निर्देशक ने उसी अंदाज में पेश किया। जुगाड़तंत्र रियल लाइफ के अलावा स्टेज पर भी खूब दिखता है। पोर्टेब्लिटी का उदाहरण भी कई जगह पर है।
भारतीय रंग महोत्सव अगर गुलजार हुआ तो उसके पीछे त्रिपुरारी शर्मा के इस नाटक का भी अहम् योगदान है । Maybe This Summer हमारी और आपकी कहानी को पूरी तरह से परिभाषित भी करता है।
लेखक
रजनीश कुमार
rajnish17kumar@gmail.com

2 comments:

  1. आप के ब्लॉग से बहुत कुछ सिखने को मिला है

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  2. आपके ब्लॉग से आने वाले नवयुवकों को बहुत कुछ सिखने को मिल रहा है

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